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Friday, 5 November 2021

समर्थशिष्य कल्याणस्वामी - ०२ - अंबाजी का ‘कल्याण’ नामकरण

।। हरि: ॐ ।। 

05-11-2021

समर्थशिष्य कल्याणस्वामी - ०२

अंबाजी का ‘कल्याण’ नामकरण 

जब मैं छोटा था, तब मेरे चाचाजी ने मुझे महान सन्त समर्थ श्री रामदास स्वामीजी की कहानियों की एक पुस्तक दी थी। उस पुस्तक में समर्थशिष्य कल्याणस्वामी की कहानियाँ भी थीं, जिन्होंने मुझे बहुत ही प्रभावित किया था। उन कहानियों से आदर्श सद्गुरुभक्त का आचरण हमें ज्ञात होता है। महान सन्त समर्थ श्री रामदासस्वामीजी के सत्-शिष्य श्री कल्याणस्वामी की कहानियाँ अपने छोटे मित्रों को सुनाते हुए आज भी मुझे बहुत आनन्द मिलता है। उन कहानियों को मैं यथामति अपनी भाषा में उन्हें सुनाता हूँ।
कल्याणस्वामी की कहानियाँ सुनाने के पीछे मेरा यही उद्देश्य होता है कि मेरे छोटे मित्रों के मन में कल्याणस्वामी के चरित्र को, उनकी सद्गुरुभक्ति को जानने की जिज्ञासा जागृत हो। अत एव कहानियों में रुचि उत्पन्न हो, उनकी दिलचस्पी बढ़े इसलिए कहानियों के मूल आशय को अबाधित रखते हुए मैं अपनी भावनाओं का समावेश करके उन्हें कहानियां सुनाता हूँ। बच्चों में भक्तिभाव बढ़ाने के उद्देश्य से मैंने यह स्वतन्त्रता ली है, जिसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।
इन्हें पढकर बच्चों में मूल चरित्र पढ़ने की उत्सुकता जागृत हो इसी प्रामाणिक हेतु के साथ इन कहानियों को प्रस्तुत कर रहा हूँ। हिन्दी भाषा के प्रति मेरे मन में सम्मान की भावना है, हिन्दी भाषा से मुझे लगाव है, परन्तु हिन्दी मेरी मातृभाषा नहीं है, इस कारण लिखने में हुईं त्रुटियों के लिए मैं क्षमा चाहता हूँ। समर्थ रामदासस्वामीजी और कल्याणस्वामी इस सद्गुरु-सत्-शिष्य की जोडी को कोटी कोटी साष्टांग प्रणाम। अंबज्ञ। नाथसंविध्।  

 




Thursday, 7 May 2020

समर्थशिष्य कल्याणस्वामी - भाग ११ - समर्थांचा कवितासमुद्र अवघा कल्याण लिहितसे (Post in Marathi)

।। हरि: ॐ ।। 

07-05-2020

समर्थशिष्य कल्याणस्वामी

भाग  ११

समर्थांचा कवितासमुद्र अवघा कल्याण लिहितसे   






 

 

Wednesday, 6 May 2020

Wednesday, 8 April 2020

अंजनीमाता हम शरण में तुम्हारी (हिन्दी) (भक्तिस्वर्धुनी- १०)

।। हरि: ॐ ।।


07-02-2020
चैत्र पूर्णिमा
हनुमान पूर्णिमा


अंजनीमाता हम शरण में तुम्हारी  

(भक्तिस्वर्धुनी- १०)  



Thursday, 2 April 2020

Saturday, 15 February 2020

सूर्य आणि चन्द्र एकत्र - शुभचिह्न मंगलप्रतीक (Algorithm)

।। हरि: ॐ ।। 

15-02-2020

सूर्य आणि चन्द्र एकत्र - शुभचिह्न मंगलप्रतीक (अल्गोरिदम) 



संदर्भ - सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांचे २०-०६-२०१३ रोजीचे प्रवचन 


Sunday, 27 October 2019

कथा अभीष्टा- २४ - नरकचतुर्दशीला चिराटे /कारीट पायाखाली का चिरडतात? (मराठी)

हरि: ॐ

27-10-2019
नरकचतुर्दशी

कथा-अभीष्टा २४

नरकचतुर्दशीला चिराटे /कारीट पायाखाली का चिरडतात? 
 
 



Friday, 13 September 2019

समर्थशिष्य कल्याणस्वामी - भाग ९ - कल्याणस्वामींना धनुर्धारी राम-लक्ष्मण भेटतात (Post in Marathi)

।। हरि: ॐ ।। 

13-09-2019

समर्थशिष्य कल्याणस्वामी

भाग  ९

कल्याणस्वामींना धनुर्धारी राम-लक्ष्मण भेटतात 





 

Wednesday, 7 August 2019

जय कविकोकिल तुलसीदासजी (भक्तिस्वर्धुनी- ०६) - Hindi

।। हरि: ॐ ।।


07-08-2019

जय कविकोकिल तुलसीदासजी 

(भक्तिस्वर्धुनी- ०६) 

महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता सन्तश्रेष्ठ गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की जयंती हमारे भारतवर्ष में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनायी जाती है। सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी सदा ही सन्तश्रेष्ठ गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की महिमा का गान करते हैं। उन्होंने दैनिक प्रत्यक्ष में श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड पर आधारित ‘तुलसीपत्र’ इस अग्रलेखमालिका का लेखन भी किया है।
आज ८ अगस्त २०१९ को गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की जयंती मनायी जा रही है। वे मेरे भी अत्यधिक प्रिय कवि हैं और परम-वन्दनीय हैं। आज के इस पावन पर्व पर गोस्वामी श्री तुलसीदासजी के चरणों में श्रद्धा एवं विनम्रतापूर्वक चंद पंक्तियाँ अर्पण कर रहा हूँ। श्रीराम।

Tuesday, 21 May 2019

हनुमानजी ही सबसे सुन्दर (भक्तिस्वर्धुनी- ०४)

।। हरि: ॐ ।।


21-05-2019

हनुमानजी ही सबसे सुन्दर 




श्रद्धावान मित्रगणों को सादर अभिवादन! हिन्दी मेरी मातृभाषा तो नहीं है, परन्तु अत्यन्त प्रिय भाषा है। सन्तश्रेष्ठ श्री तुलसीदासजी मेरे अत्यन्त प्रिय सन्त हैं और उनके द्वारा विरचित श्रीरामचरितमानस का सुन्दरकाण्ड, हनुमानचलिसा इनका पाठ करते करते और सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी द्वारा दैनिक प्रत्यक्ष में प्रकाशित हो रही सुन्दरकाण्ड पर आधारित तुलसीपत्र इस अग्रलेखमाला को पढते पढते रामदूत हनुमानजी के प्रति जो प्रेम हृदय में प्रवाहित हुआ, उसे इस रचना में अपने बालसुलभ शब्दों के द्वारा प्रकट किया  है, अत एव मुझसे लेखन में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ। 

Monday, 31 December 2018

कथा-अभीष्टा - १९ बुद्धि दे रघुनायका ! (A Story in Marathi)

।। हरि: ॐ।।

31-12-2018

 

कथा-अभीष्टा - १९

आज श्रेष्ठ सन्त परमपूज्य सद्गुरु ब्रह्मचैतन्य श्री गोंदवलेकर महाराज यांचा महासमाधि-स्मरण दिवस. सोमवार, मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी शके १८३५ म्हणजेच दिनांक २२ डिसेंबर १९१३ रोजी पहाटे ५ वाजून ५५ मिनिटांनी ‘जेथें नाम, तेथें माझे प्राण, ही सांभाळावी खूण’ हे निरोपाचे शब्द उच्चारून महाराजांनी इहलोकाचा निरोप घेतला. परमपूज्य महाराजांच्या चरणी आजची ही कथा अर्पण करत आहे.

बुद्धि दे रघुनायका!