‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
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Wednesday, 22 April 2020
कथा अभीष्टा- २८ - अनुभवातून ठरवलेले नियम पाळण्यातच हित (Marathi) (Story for Kids & Children)
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Tuesday, 14 April 2020
Thursday, 31 January 2019
Monday, 31 December 2018
कथा-अभीष्टा - १९ बुद्धि दे रघुनायका ! (A Story in Marathi)
।। हरि: ॐ।।
31-12-2018
कथा-अभीष्टा - १९
आज श्रेष्ठ सन्त परमपूज्य सद्गुरु ब्रह्मचैतन्य श्री गोंदवलेकर महाराज यांचा महासमाधि-स्मरण दिवस. सोमवार, मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी शके १८३५ म्हणजेच दिनांक २२ डिसेंबर १९१३ रोजी पहाटे ५ वाजून ५५ मिनिटांनी ‘जेथें नाम, तेथें माझे प्राण, ही सांभाळावी खूण’ हे निरोपाचे शब्द उच्चारून महाराजांनी इहलोकाचा निरोप घेतला. परमपूज्य महाराजांच्या चरणी आजची ही कथा अर्पण करत आहे.
बुद्धि दे रघुनायका!
Wednesday, 19 December 2018
Tuesday, 19 June 2018
Friday, 11 May 2018
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