‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
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Monday, 23 December 2019
Saturday, 16 November 2019
Saturday, 7 July 2018
Monday, 19 March 2018
श्री स्वामी समर्थ बखर अनुभव- ०९ (Post in Hindi)
।। हरि: ॐ ।।
19-03-2018
चैत्र शुद्ध द्वितीया सद्गुरु श्री स्वामी समर्थ प्रकटदिन
श्री स्वामी समर्थ बखर अनुभव- ०९
आज चैत्र शुद्ध द्वितीया, श्रीगुरु श्री स्वामी समर्थ महाराज का प्रकटदिन। श्रीगुरु श्री स्वामी समर्थ महाराज को साष्टांग वन्दन करते हुए हमारा आज का अध्ययन करते हैं, जिसमें हम स्वामी समर्थ के एक श्रेष्ठ भक्त श्रीपादभट की कथा देखने वाले हैं। श्री स्वामी समर्थ जय जय स्वामी समर्थ।
ॐ अभयदाता श्री स्वामी समर्थाय नम:।
Thursday, 1 February 2018
Friday, 1 September 2017
Thursday, 18 May 2017
Saturday, 29 April 2017
Monday, 21 April 2014
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