‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
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Wednesday, 22 July 2020
Monday, 20 July 2020
Monday, 2 September 2019
Saturday, 31 August 2019
Wednesday, 7 August 2019
जय कविकोकिल तुलसीदासजी (भक्तिस्वर्धुनी- ०६) - Hindi
।। हरि: ॐ ।।
07-08-2019
जय कविकोकिल तुलसीदासजी
(भक्तिस्वर्धुनी- ०६)
महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता सन्तश्रेष्ठ गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की जयंती हमारे भारतवर्ष में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनायी जाती है। सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी सदा ही सन्तश्रेष्ठ गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की महिमा का गान करते हैं। उन्होंने दैनिक प्रत्यक्ष में श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड पर आधारित ‘तुलसीपत्र’ इस अग्रलेखमालिका का लेखन भी किया है।
आज ८ अगस्त २०१९ को गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की जयंती मनायी जा रही है। वे मेरे भी अत्यधिक प्रिय कवि हैं और परम-वन्दनीय हैं। आज के इस पावन पर्व पर गोस्वामी श्री तुलसीदासजी के चरणों में श्रद्धा एवं विनम्रतापूर्वक चंद पंक्तियाँ अर्पण कर रहा हूँ। श्रीराम।
आज ८ अगस्त २०१९ को गोस्वामी श्री तुलसीदासजी की जयंती मनायी जा रही है। वे मेरे भी अत्यधिक प्रिय कवि हैं और परम-वन्दनीय हैं। आज के इस पावन पर्व पर गोस्वामी श्री तुलसीदासजी के चरणों में श्रद्धा एवं विनम्रतापूर्वक चंद पंक्तियाँ अर्पण कर रहा हूँ। श्रीराम।
Sunday, 14 July 2019
ग्रहण (Hindi)
।। हरि: ॐ ।।
14-07-2019
ग्रहण
अनेक श्रद्धावान मित्रों के द्वारा ग्रहणकाल, प्रपत्ति और ग्रहणकालीन चर्या के बारे में प्रश्न पूछे जा रहे थे। मराठी में इससे संबंधित जो जानकारी समीरदादा के ब्लॉग आदि स्रोतों पर उपलब्ध थी, उसकी सहायता से यह हिन्दी संकलन किया गया है, जिसमें संबंधित मराठी जानकारी के लिंक्स भी दिये गये हैं। आशा करता हूं कि मेरे श्रद्धावान मित्रों तक उचित जानकारी पहुंचाने का मेरा यह प्रयास सद्गुरुकृपा से सफल होगा।
Monday, 31 December 2018
कथा-अभीष्टा - १९ बुद्धि दे रघुनायका ! (A Story in Marathi)
।। हरि: ॐ।।
31-12-2018
कथा-अभीष्टा - १९
आज श्रेष्ठ सन्त परमपूज्य सद्गुरु ब्रह्मचैतन्य श्री गोंदवलेकर महाराज यांचा महासमाधि-स्मरण दिवस. सोमवार, मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी शके १८३५ म्हणजेच दिनांक २२ डिसेंबर १९१३ रोजी पहाटे ५ वाजून ५५ मिनिटांनी ‘जेथें नाम, तेथें माझे प्राण, ही सांभाळावी खूण’ हे निरोपाचे शब्द उच्चारून महाराजांनी इहलोकाचा निरोप घेतला. परमपूज्य महाराजांच्या चरणी आजची ही कथा अर्पण करत आहे.
बुद्धि दे रघुनायका!
Thursday, 23 February 2017
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