‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
Monday, 9 April 2018
दोस्ताना सदा रहे (Poem in Hindi)
Saturday, 7 April 2018
बॉक्स ऑफिस -०१ - संत तुकाराम फिल्म (१९३६) (Post in Hindi)
।। हरि: ॐ ।।
07-04-2018
बॉक्स ऑफिस -०१
संत तुकाराम फिल्म (१९३६)
(संत तुकाराम फिल्म (१९३६) यह मेरी एक बहुत ही पसंदीदा फिल्म है। इसे मैंने बहुत बार देखा है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध के लेखन-भाषण आदि में जगद्गुरु सन्तश्रेष्ठ तुकाराम महाराज की भक्तिमहिमा का उल्लेख बहुत बार आता है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध के साथ पंढरपुर भावयात्रा के समय हम सब श्रद्धावानों ने यह फिल्म देखी थी, वे पल हम सबके जीवन के यादगार पल बन गये हैं। भगवान श्री विठ्ठल के चरणों में यही प्रार्थना है जगद्गुरु सन्तश्रेष्ठ तुकाराम महाराज की भगवद्भक्ति का एक कण हमें प्रसाद के रूप में प्रदान करें, जिससे कि हमारा जीवन धन्य धन्य हो जाये। अंबज्ञ । नाथसंविध् । )
Labels:
1936,
award,
booking,
box office,
cinema,
drama,
film,
film festival,
marathi,
movie,
natak,
pandurang,
prabhat,
Sant,
sant tukaram,
theatre,
ticket,
vaikuntha,
venice,
viththal
Subscribe to:
Posts (Atom)













