।। हरि: ॐ ।।
‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
Saturday, 19 December 2020
Saturday, 14 November 2020
गीत किस्से कहानियाँ यादें ... शहद की बूँदें ... ४४ - माई री मैं कासे कहूँ पीर अपने जिया की - भाग २
।। हरि: ॐ।।
14- 11- 2020
गीत किस्से कहानियाँ यादें ... शहद की बूँदें ... ४४
माई री मैं कासे कहूँ पीर अपने जिया की
भाग २
https://www.youtube.com/watch?v=-zEPISlW5uU
https://radioplaybackindia.blogspot.com/2016/06/swargoshthi-276-rag-charukeshi.html?m=1
गीत किस्से कहानियाँ यादें ... शहद की बूँदें ... ४३ - माई री मैं कासे कहूँ पीर अपने जिया की - भाग १
।। हरि: ॐ।।
14- 11- 2020
गीत किस्से कहानियाँ यादें ... शहद की बूँदें ... ४३
माई री मैं कासे कहूँ पीर अपने जिया की
भाग १
https://www.madanmohan.in/html/tribute/events/mairi.html
https://www.youtube.com/watch?v=-zEPISlW5uU
https://radioplaybackindia.blogspot.com/2016/06/swargoshthi-276-rag-charukeshi.html?m=1
Friday, 9 October 2020
गीत किस्से कहानियाँ यादें ... शहद की बूँदें ... ३७ - ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ.....
।। हरि: ॐ।।
09- 10- 2020
गीत किस्से कहानियाँ यादें ... शहद की बूँदें ... ३७
ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ.....
मेरी कॉलेज की सहपाठी दोस्त चारु ने हमारे बॅचमेट्स् के ग्रुप में अपनी आवाज़ में ‘ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ’ यह गीत पोस्ट किया। उसने अपनी मधुर आवाज़ में यह गीत (फिल्म में लतादीदी द्वारा गाया गया) बहुत ही सुन्दर रूप में गाया था।
पुराने समय के ये गीत हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। इस गीत को इतने सालों से सुनते हुए मेरे मन में जो भाव आते थे, उन्हें अपने दोस्तों के साथ शेअर करने का मन हुआ और उसमें से कुछ लिखा गया, जिसे प्रस्तुत कर रहा हूँ।
मैं गीत-संगीत का जानकार नहीं हूँ, पर दोस्तों के साथ अपने दिल की बात साझा करना अच्छा लगता है। लिखने में मुझसे कोई गलती हुई हो तो क्षमा चाहता हूँ। आशा करता हूँ कि मेरे दोस्त इसे पसंद करेंगे।
Saturday, 19 September 2020
काट्यांची गजल (Marathi)
।। हरि: ॐ ।।
काट्यांची गजल
आज बर्याच वर्षांनी एका मित्राचा फोन आला. त्याचा आणि माझा गेल्या २७ वर्षांत काही संपर्क नव्हता. त्याला माझा नंबर मिळाला म्हणून त्याने फोन केला. त्याच्याकडून त्याच्या आयुष्याचा खडतर प्रवास कळला आणि आजही त्याच्या नशिबात काटे रुतणेच आहे हे त्याच्या बोलण्यातून जाणवले. त्याची जीवनाबद्दल किंवा कुणाबद्दल काही तक्रार नव्हती. मला त्याची व्यथा-वेदना ऐकून खूप वाईट वाटले. मी त्याला म्हटले की देवाकडे प्रार्थना करीन. देव करो आणि कुणावरही अशी परिस्थिती न येवो. मला धन्यवाद देत तो म्हणाला, आता काट्यांशीच मैत्री झाली आहे रे, काट्यांशिवाय करमणारच नाही. त्याचे हे वाक्य मनात खूप खोलवर रुतले आणि त्यानंतर सुचलेल्या या काही ओळी.

















