Showing posts with label Son. Show all posts
Showing posts with label Son. Show all posts

Tuesday, 2 December 2025

माँ नहीं रही, अनाथ हो गया.....

 ॥ हरि: ॐ ॥   
 

02-12-2025


माँ नहीं रही, अनाथ हो गया.....  

 

 

मेरे एक मित्र की माँ का देहान्त हो गया। उसका दुख देखकर मेरा हृदय भी व्यथित हो गया और वह व्यथा इन शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त हुई। मेरी माँ तो जीवित है, आदिमाता जगदंबा मेरी माँ को निरामय दीर्घायु प्रदान करें, यह आदिमाता के चरणों प्रार्थना। मित्र को हो रहे माँ के विरह के कारण मेरा मन तड़प उठा और आँसुओं के साथ ये शब्द अपने आप आ गये। हिन्दी मेरी मातृभाषा नहीं है, परन्तु प्रिय भाषा है; मुझसे लिखने में कोई गलती हुई हो तो क्षमा चाहता हूँ। अंबज्ञ। नाथसंविध् ।
 



Sunday, 20 September 2020

मेरी रखवाली तुम ही हो माँ (Hindi)

  ।। हरि: ॐ ।। 

20-09-2020

मेरी रखवाली तुम ही हो माँ

आज मेरी माँ का जन्मदिन है। मेरी माँ ने मेरे लिए बहुत कुछ सहा है, मेरे लिए असीम त्याग किया है। आज मैं जो कुछ भी हूँ, वह मेरी माँ की मेहनत और आशीर्वाद से हूँ। माँ का प्यार अनन्त है, माँ के ऋण अनन्त हैं। माँ के लिए ईश्वर से निरामय आनन्दमय दीर्घायु की प्रार्थना करता हूँ और माँ के लिए आज लिखीं कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।




 
 
 
 
 

Thursday, 20 August 2020

जवळ तोच आहे  (Marathi)

 ।। हरि: ॐ ।। 

गुरुवार
20-08-2020

जवळ तोच आहे