‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
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Friday, 3 July 2020
Monday, 20 April 2020
श्री स्वामी समर्थ बखर अनुभव- १३ - श्रीगुरु भूतकाळ बदलतात (Post in Marathi)
।। हरि: ॐ ।।
20-04-2020
चैत्र कृष्ण त्रयोदशी श्रीगुरु अक्कल्कोटनिवासी श्री स्वामी समर्थ महाराज समाधिलीला दिवस
श्री स्वामी समर्थ बखर अनुभव- १३
आज अक्कलकोटनिवासी श्री स्वामी समर्थ महाराजांचा समाधिलीला दिवस. श्रीगुरु स्वामी माउलीच्या चरणी त्यांच्या एका नातवाने अर्पण केलेले हे अभ्यास-पुष्प.
श्रीगुरु भूतकाळ बदलतात
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