‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
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Saturday, 22 December 2018
Saturday, 14 April 2018
श्री स्वामी समर्थ बखर अनुभव अध्ययन - १० (Post in Hindi)
।। हरि: ॐ ।।
14-04-2018
चैत्र कृष्ण त्रयोदशी श्रीगुरु अक्कल्कोटनिवासी श्री स्वामी समर्थ महाराज समाधिलीला दिवस
श्री स्वामी समर्थ बखर अनुभव- १०
आज अक्कलकोटनिवासी श्री स्वामी समर्थ महाराज का समाधिलीला दिवस है। श्रीगुरु स्वामी समर्थ के चरणों में उनके एक नन्हें बालक के द्वारा अर्पण किया गया यह एक अध्ययनपुष्प।
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