‘अंबज्ञोऽस्मि’ ‘नाथसंविध्’ ‘अंबज्ञोऽस्मि’ का अर्थ है-मैं अंबज्ञ हूँ। अंबज्ञता का अर्थ है-आदिमाता के प्रति श्रद्धावान के मन में होनेवाली और कभी भी न ढल सकनेवाली असीम सप्रेम कृतज्ञता। (संदर्भ–मातृवात्सल्य उपनिषद्) नाथसंविध् अर्थात् निरंजननाथ, सगुणनाथ और सकलनाथ इन तीन नाथों की इच्छा, प्रेम, करुणा, क्षमा और सामर्थ्य सहायता इन पंचविशेषों के द्वारा बनायी गयी संपूर्ण जीवन की रूपरेखा। (संदर्भ–तुलसीपत्र १४२९)
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Wednesday, 18 October 2017
Saturday, 15 July 2017
श्री शिरडी साईबाबांची ११ वचने - श्री शिरडी साईबाबा के ग्यारह वचन - 11 Assurances of Shirdi Sai Baba
।। हरि: ॐ ।।
15-07-2017
श्री शिरडी साईबाबांची ११ वचने
श्री शिरडी साईबाबा के ग्यारह वचन
11 Assurances of Shirdi Sai Baba
यथामति प्रयास किया है, प्रयास में हुई त्रुटियों के लिए क्षमाप्रार्थना।
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